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शाह-ए-जीलाँ पीर-ए-पीराँ मीर-ए-मीराँ / Shah-e-Jeelan Peer-e-Peeran Meer-e-Meeran

शाह-ए-जीलाँ, पीर-ए-पीराँ, मीर-ए-मीराँ तलब का मुँह तो किस क़ाबिल है, या ग़ौस ! मगर तेरा करम कामिल है, या ग़ौस ! शाह-ए-जीलाँ, पीर-ए-पीराँ, मीर-ए-मीराँ दुहाई या मुहिय्युद्दीन दुहाई बला इस्लाम पर नाज़िल है, या ग़ौस ! शाह-ए-जीलाँ, पीर-ए-पीराँ, मीर-ए-मीराँ 'अज़ूमन क़ातिलन 'इंदल-क़िताली मदद को आ दम-ए-बिस्मिल है, या ग़ौस ! शाह-ए-जीलाँ, पीर-ए-पीराँ, मीर-ए-मीराँ ख़ुदा-रा नाख़ुदा आ दे सहारा हवा बिगड़ी भँवर हाइल है, या ग़ौस ! शाह-ए-जीलाँ, पीर-ए-पीराँ, मीर-ए-मीराँ तेरा वक़्त और पड़े यूँ दीन पर वक़्त न तू 'आजिज़ न तू ग़ाफ़िल है, या ग़ौस ! शाह-ए-जीलाँ, पीर-ए-पीराँ, मीर-ए-मीराँ रही हाँ शामत-ए-आ'माल ये भी जो तू चाहे अभी ज़ाइल है, या ग़ौस ! शाह-ए-जीलाँ, पीर-ए-पीराँ, मीर-ए-मीराँ ग़यूरा ! अपनी ग़ैरत का तसद्दुक़ वही कर जो तेरे क़ाबिल है, या ग़ौस ! शाह-ए-जीलाँ, पीर-ए-पीराँ, मीर-ए-मीराँ ख़ुदा-रा मरहम-ए-ख़ाक-ए-क़दम दे जिगर ज़ख़्मी है दिल घाइल है, या ग़ौस ! शाह-ए-जीलाँ, पीर-ए-पीराँ, मीर-ए-मीराँ तेरे बाबा का फिर तेरा करम है ये मुँह वरना किसी क़ाबिल है, या ग़ौस ! शाह-ए-जीलाँ, पीर-ए-पीराँ, मीर-ए-मीराँ...

तलब का मुँह तो किस क़ाबिल है या ग़ौस / Talab Ka Munh To Kis Qabil Hai Ya Ghaus

तलब का मुँह तो किस क़ाबिल है, या ग़ौस ! मगर तेरा करम कामिल है, या ग़ौस ! दुहाई या मुहिय्युद्दीन दुहाई बला इस्लाम पर नाज़िल है, या ग़ौस ! वो सँगीं बिद'अतें वो तेज़ी-ए-कुफ़्र कि सर पर तेग़ दिल पर सिल है, या ग़ौस ! 'अज़ूमन क़ातिलन 'इंदल-क़िताली मदद को आ दम-ए-बिस्मिल है, या ग़ौस ! ख़ुदा-रा नाख़ुदा आ दे सहारा हवा बिगड़ी भँवर हाइल है, या ग़ौस ! जिला दे दीं, जला दे कुफ़्र-ओ-इल्हाद कि तू मुह्यी है तू क़ातिल है, या ग़ौस ! तेरा वक़्त और पड़े यूँ दीन पर वक़्त न तू 'आजिज़ न तू ग़ाफ़िल है, या ग़ौस ! रही हाँ शामत-ए-आ'माल ये भी जो तू चाहे अभी ज़ाइल है, या ग़ौस ! ग़यूरा ! अपनी ग़ैरत का तसद्दुक़ वही कर जो तेरे क़ाबिल है, या ग़ौस ! ख़ुदा-रा मरहम-ए-ख़ाक-ए-क़दम दे जिगर ज़ख़्मी है दिल घाइल है, या ग़ौस ! न देखूँ शक्ल-ए-मुश्किल तेरे आगे कोई मुश्किल सी ये मुश्किल है, या ग़ौस ! वो घेरा रिश्ता-ए-शिर्क-ए-ख़फ़ी ने फँसा ज़ुन्नार में ये दिल है, या ग़ौस ! किये तरसा-ओ-गब्र अक़्ताब-ओ-अब्दाल ये महज़ इस्लाम का साइल है, या ग़ौस ! तू क़ुव्वत दे मैं तन्हा काम बिस्यार बदन कमज़ोर दिल काहिल है, या ग़ौस ! 'अदू बद-दीन मज़ह...

पड़े मुझ पर न कुछ उफ़्ताद या ग़ौस / Pade Mujh Par Na Kuchh Uftad Ya Ghous

पड़े मुझ पर न कुछ उफ़्ताद, या ग़ौस ! मदद पर हो तेरी इमदाद, या ग़ौस ! उड़े तेरी तरफ़ बा'द-ए-फ़ना ख़ाक न हो मिट्टी मेरी बर्बाद, या ग़ौस ! मेरे दिल में बसें जल्वे तुम्हारे ये वीराना बने बग़दाद, या ग़ौस ! न भूलूँ भूल कर भी याद तेरी न याद आए किसी की याद, या ग़ौस ! मुरीदी ला-तख़फ़ फरमाते आओ बलाओं में है ये नाशाद, या ग़ौस ! गले तक आ गया सैलाब ग़म का चला मैं आइये फ़रियाद, या ग़ौस ! नशेमन से उड़ा कर भी न छोड़ा अभी है घात में सय्याद, या ग़ौस ! ख़मीदा सर गिरिफ़्तार-ए-क़ज़ा है कशीदा ख़ंजर-ए-जल्लाद, या ग़ौस ! अँधेरी रात, जंगल, मैं अकेला मदद का वक्त है फ़रियाद, या ग़ौस ! खिला दो ग़ुंचा-ए-ख़ातिर कि तुम हो बहार-ए-गुलशन-ए-ईजाद, या ग़ौस ! मेरे ग़म कि कहानी आप सुन लें कहूँ मैं किस से ये रूदाद, या ग़ौस ! रहूँ आज़ाद-ए-क़ैद-ए-'इश्क़ कब तक करो इस क़ैद से आज़ाद, या ग़ौस ! करोगे कब तक अच्छा मुझ बुरे को मेरे हक़ में है क्या इर्शाद, या ग़ौस ! ग़म-ए-दुनिया ग़म-ए-क़ब्र-ओ-ग़म-ए-हश्र ख़ुदा-रा कर दो मुझ को शाद, या ग़ौस ! हसन मँगता है दे दे भीक दाता रहे ये राज-पाट आबाद, या ग़ौस ! शायर: मौलाना हसन रज़ा ख़ान बरेलवी ना'त-ख़्व...

फ़ासलों को ख़ुदारा मिटा दो | जालियों पर निगाहें जमी हैं / Faslon Ko Khudara Mita Do | Jaliyon Par Nigahen Jami Hain

Rukh Se Parda Ab Apne Hata Do Lyrics in Hindi, English & Urdu फ़ासलों को ख़ुदा-रा मिटा दो जालियों पर निगाहें जमी हैं अपना जल्वा इसी में दिखा दो जालियों पर निगाहें जमी हैं फ़ासलों को ख़ुदा-रा मिटा दो जालियों पर निगाहें जमी हैं रुख़ से पर्दा अब अपने हटा दो जालियों पर निगाहें जमी हैं फ़ासलों को ख़ुदा-रा मिटा दो जालियों पर निगाहें जमी हैं ग़ौस-उल-आ'ज़म हो, ग़ौस-उल-वरा हो नूर हो नूर-ए-सल्ले-'अला हो क्या बयाँ आप का मर्तबा हो ! दस्त-गीर और मुश्किल-कुशा हो आज दीदार अपना करा दो जालियों पर निगाहें जमी हैं फ़ासलों को ख़ुदा-रा मिटा दो जालियों पर निगाहें जमी हैं एक मुजरिम सियाह-कार हूँ मैं हर ख़ता का सज़ा-वार हूँ मैं मेरे चारों तरफ़ है अँधेरा रौशनी का तलबग़ार हूँ मैं इक दिया ही समझ कर जला दो जालियों पर निगाहें जमी हैं फ़ासलों को ख़ुदा-रा मिटा दो जालियों पर निगाहें जमी हैं वज्द में आएगा सारा 'आलम हम पुकारेंगे, या ग़ौस-ए-आ'ज़म वो निकल आएँगे जालियों से और क़दमों में गिर जाएँगे हम फिर कहेंगे कि बिगड़ी बना दो जालियों पर निगाहें जमी हैं फ़ासलों को ख़ुदा-रा मिटा दो जालियों प...

मुस्तफ़ा जान-ए-रहमत पे लाखों सलाम (मुख़्तसर) / Mustafa Jaan-e-Rehmat Pe Lakhon Salam (Short)

Mustafa Jane Rehmat Pe Lakhon Salam Lyrics in Hindi & English मुस्तफ़ा जान-ए-रहमत पे लाखों सलाम शम'-ए-बज़्म-ए-हिदायत पे लाखों सलाम मेहर-ए-चर्ख़-ए-नुबुव्वत पे रौशन दुरूद गुल-ए-बाग़-ए-रिसालत पे लाखों सलाम शहरयार-ए-इरम, ताजदार-ए-हरम नौ-बहार-ए-शफ़ा'अत पे लाखों सलाम शब-ए-असरा के दूल्हा पे दाइम दुरूद नौशा-ए-बज़्म-ए-जन्नत पे लाखों सलाम 'अर्श ता फ़र्श है जिस के ज़ेर-ए-नगीं उस की क़ाहिर रियासत पे लाखों सलाम फ़त्ह-ए-बाब-ए-नुबुव्वत पे बेहद दुरूद ख़त्म-ए-दौर-ए-रिसालत पे लाखों सलाम हम ग़रीबों के आक़ा पे बेहद दुरूद हम फ़क़ीरों की सरवत पे लाखों सलाम दूर-ओ-नज़दीक के सुनने वाले वो कान कान-ए-ला'ल-ए-करामत पे लाखों सलाम जिस के माथे शफ़ा'अत का सेहरा रहा उस जबीन-ए-स'आदत पे लाखों सलाम जिन के सज्दे को मेहराब-ए-का'बा झुकी उन भवों की लताफ़त पे लाखों सलाम जिस तरफ़ उठ गई दम में दम आ गया उस निगाह-ए-'इनायत पे लाखों सलाम नीची आँखों की शर्म-ओ-हया पर दुरूद ऊँची बीनी की रिफ़'अत पे लाखों सलाम पतली पतली गुल-ए-क़ुद्‌स की पत्तियाँ उन लबों की नज़ाकत पे लाखों सलाम वो दहन जिस की...

ऐ शह-ए-अबरार अहलन व सहलन मरहबा / Aye Shah-e-Abrar Ahlan Wa Sahlan Marhaba

Aye Shah-e-Abrar Ahlan Wa Sahlan Marhaba Lyrics in Hindi, English & Urdu ऐ शह-ए-अबरार ! अहलव्-व-सहलन मरहबा ऐ मेरे सरदार ! अहलव्-व-सहलन मरहबा महबूब-ए-ग़फ़्फ़ार ! अहलव्-व-सहलन मरहबा मख़ज़न-ए-अनवार ! अहलव्-व-सहलन मरहबा ऐ शह-ए-अबरार ! अहलव्-व-सहलन मरहबा ऐ मेरे सरदार ! अहलव्-व-सहलन मरहबा दो जग के मुख़्तार ! अहलव्-व-सहलन मरहबा सय्यिद-ओ-सालार ! अहलव्-व-सहलन मरहबा ऐ शह-ए-अबरार ! अहलव्-व-सहलन मरहबा ऐ मेरे सरदार ! अहलव्-व-सहलन मरहबा दे दिए रब ने तुझ को ख़ज़ाने बे-बहा मालिक-ओ-मुख़्तार ! अहलव्-व-सहलन मरहबा ऐ शह-ए-अबरार ! अहलव्-व-सहलन मरहबा ऐ मेरे सरदार ! अहलव्-व-सहलन मरहबा रोज़-ए-महशर हो साया-कुनाँ हम पर तेरे गेसू-ए-ख़मदार, अहलव्-व-सहलन मरहबा ऐ शह-ए-अबरार ! अहलव्-व-सहलन मरहबा ऐ मेरे सरदार ! अहलव्-व-सहलन मरहबा जगमगा दो दिल, सरकार ! दिखला कर हमें नूरानी रुख़्सार, अहलव्-व-सहलन मरहबा ऐ शह-ए-अबरार ! अहलव्-व-सहलन मरहबा ऐ मेरे सरदार ! अहलव्-व-सहलन मरहबा 'इस्याँ का बीमार अब तो शिफ़ा पाए, शहा ! हो करम, सरकार ! अहलव्-व-सहलन मरहबा ऐ शह-ए-अबरार ! अहलव्-व-सहलन मरहबा ऐ मेरे सरदार ! अहलव्-व...